सहारनपुर। शास्त्री नगर स्थित बाबा अमरनाथ मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिन कथा व्यास आचार्य हरिओम महाराज जी के श्री मुख से नारद व्यास संवाद, पांडव चरित्र और श्री शुकदेव जी के आगमन प्रसंग पर कथा सुनाई।
कथा व्यास आचार्य हरिओम जी ने सार रूप में बताया कि श्रीमद् भागवत तो दिव्य कल्पतरु है, कलियुग में भगवत पुराण श्रवण कल्पवृक्ष से भी बढ़कर है। इसके श्रवण करने से अर्थ, धर्म, काम त्याग के साथ साथ भक्ति और मुक्ति प्रदान करके जीव परमपद प्राप्त कराता है। ऋषि वेदव्यास जी के पुत्र श्री शुकदेव जी महाभारत काल के मुनि थे जो बचपन में ही ज्ञान प्राप्ति की खोज में घर त्याग कर वन में चले गए थे। सुखदेव जी महाराज ने बताया संसार रूपी समुद्र में कमल रूपी भंवरा बनकर रहना अच्छा है जो कीचड़ में रहते हुए भी मदमस्त रहता है।
बाद में उन्होंने राजा परीक्षित को श्रीमद् भगवत पुराण की कथा ज्ञान दिया था। कथा व्यास हरिओम महाराज जी ने कहा श्रीमद् भागवत केवल पुस्तक नहीं है साक्षात कृष्ण स्वरूप है जिसके एक एक अक्षर में श्री कृष्ण समाए हुए हैं। कथा वाचन में पंडित सचिन भारद्वाज, आचार्य अमित, आचार्य भीम, आचार्य कन्हैया, आचार्य अनुज पांडे का। विशेष सहयोग रहा। आज के कथा का प्रारंभ डा सौरभ खुराना ने कथा व्यास आचार्य हरिओम जी को तिलक लगाकर, पटका पहना कर किया। कथा श्रवण के लिए करीब 90 महिलाओं के साथ करीब 30 पुरुषों में संस्था संरक्षक अरुण जिन्दल, अध्यक्ष डा अशोक कुमार गुप्ता, सचिव विजय खुराना , कोषाध्यक्ष विजय शंकर शर्मा, दीपक कपूर, तजेंद्र कौशल, सुरेंद्र कुमार, विपिन कुमार, गुरमीत अरोरा, आदि ने उपस्थित रह कर कथा संचालन में सहयोग प्रदान किया।
श्रीमद्भागवत साक्षात कृष्ण स्वरूप है, इसके श्रवण से मिलता है परम पदः आचार्य हरिओम महाराज