सहारनपुर की प्रबुद्ध नारी शक्ति ने भरी हुंकार, अधिनियम से बदलेगी राष्ट्र की नियति

The enlightened women power of Saharanpur roared, the destiny of the nation will change with this Act.

सहारनपुर। नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2026 के ऐतिहासिक अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए सहारनपुर महानगर की प्रतिष्ठित और प्रभावशाली महिलाओं ने अपने विचारों को समाहित करते हुए महिलाओं की भागीदारी से किस प्रकार देश की दिशा और दशा में बदलाव होने जा रहा है, पर अपने विचार रखे। बालाजी डायग्नोस्टिक की डायरेक्टर डॉ. दीपशिखा खन्ना का मानना है कि जिस प्रकार एक महिला परिवार के स्वास्थ्य की धुरी होती है, उसी प्रकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम उन्हें देश के श्राजनीतिक स्वास्थ्यश् को सुधारने का अवसर देगा। नीति निर्धारण में 33ः भागीदारी से स्वास्थ्य सेवाओं में संवेदनशीलता और सुधारात्मक बदलाव आएंगे।
मुन्ना लाल डिग्री कॉलेज की प्रोफेसर अमिता अग्रवाल के अनुसार, यह अधिनियम छात्राओं के लिए नए रोल मॉडल तैयार करेगा। जब उच्च शिक्षण संस्थानों की महिलाएं संसद पहुंचेंगी, तो वे शिक्षा और शोध के क्षेत्र में व्यावहारिक नीतियां बनवा सकेंगी, जिससे आने वाली पीढ़ी का भविष्य उज्जवल होगा। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सविता वर्मा का लेख इस बात पर केंद्रित है कि महिलाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को अब तक वह प्राथमिकता नहीं मिली जो मिलनी चाहिए थी। इस अधिनियम के जरिए डॉक्टर और विशेषज्ञ महिलाएं सदन में जाकर स्वास्थ्य नीतियों को महिला-अनुकूल बना पाएंगी।
पूर्व सीएमओ डॉ. रंजना चौधरी का कहना है कि प्रशासनिक अनुभव रखने वाली महिलाओं के लिए यह अधिनियम एक बड़ा मंच है। स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसे विषयों पर अनुभवी महिलाओं की राय देश के विकास की गति को दोगुना कर देगी। नीना जैन लिखती हैं कि अब तक महिलाएं दूसरों की समस्याओं को उजागर करती रही हैं, लेकिन नारी शक्ति वंदन अधिनियम उन्हें खुद उन समस्याओं का समाधान करने की शक्ति प्रदान करेगा। यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ और विधायी स्तंभ का मिलन है। प्रोफेसर मेजर डॉ. शशि नौटियाल के अनुसार, सेना जैसा अनुशासन और शिक्षा जैसी गहराई अब देश की संसद में दिखेगी। यह अधिनियम राष्ट्र की रक्षा और नीति निर्माण में महिलाओं की बराबरी की हिस्सेदारी सुनिश्चित करता है। अधिवक्ता किरण चोपड़ा का मानना है कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों और पारिवारिक कानूनों में सुधार के लिए सदन में महिला वकीलों की मौजूदगी अनिवार्य है। यह अधिनियम न्याय प्रक्रिया को और अधिक संवेदनशील बनाएगा।

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