सहारनपुर। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने किसानों, कृषि मजदूरों एवं ग्रामीण भारत से जुड़े ज्वलंत मुद्दों के समाधान की मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कृषि क्षेत्र की समस्याओं का शीघ्र समाधान करते हुए किसानों के हित में ठोस निर्णय लेने की मांग की गई।
जिलाध्यक्ष नरेश स्वामी ने कहा कि भारतीय किसान यूनियन पिछले चार दशकों से किसानों, कृषि मजदूरों एवं ग्रामीण समाज के अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण संघर्ष कर रही है। उन्होंने कहा कि बढ़ती खेती लागत, फसलों के लाभकारी मूल्य का अभाव, गन्ना किसानों का लंबित भुगतान, उर्वरकों की कमी तथा प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसान लगातार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। ज्ञापन में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते सहित ऐसे किसी भी मुक्त व्यापार समझौते का विरोध किया गया, जिससे भारतीय कृषि, डेयरी, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी), सार्वजनिक खरीद व्यवस्था एवं ग्रामीण रोजगार प्रभावित हों। साथ ही डेयरी क्षेत्र में विदेशी दुग्ध उत्पादों के अनियंत्रित आयात पर रोक लगाने, किसानों के पारंपरिक बीज अधिकारों की रक्षा करने, कृषि आधारित उद्योगों एवं खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों का विस्तार कर ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार सृजित करने की मांग उठाई गई।
भाकियू (टिकैत) ने भूमि अधिग्रहण कानून-2013 का सख्ती से पालन कराने, किसानों एवं ग्रामीण परिवारों के पुनर्वास के बिना भूमि अधिग्रहण या बेदखली की कार्रवाई न करने तथा प्राकृतिक संसाधनों, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए प्रभावी एवं न्यायसंगत जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू करने की भी मांग की।
ज्ञापन में कहा गया कि कृषि केवल किसानों की आजीविका का साधन नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला है। यदि किसानों की समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया तो इसका व्यापक असर देश की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण समाज पर पड़ेगा। इसलिए सरकार से सभी मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया गया।
किसानों की 15 सूत्रीय मांगों को लेकर भाकियू (टिकैत) ने प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन