हज यात्रा 2026ः सुविधाओं के अभाव में सिसकते हाजी और प्रशासनिक लापरवाही

Hajj Pilgrimage 2026: Pilgrims Suffering Amidst a Lack of Facilities and Administrative Negligence

सऊदी अरब। सऊदी अरब से आ रहे वायरल वीडियो ने इस साल की हज यात्रा पर गए भारतीय हाजियों की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर एक के बाद एक सामने आ रहे वीडियो व्यवस्थाओं की पोल खोल रहे हैं, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि करीब चार लाख रुपये खर्च करने के बाद भी हाजियों को बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है। यह स्थिति न केवल चिंताजनक है, बल्कि जिम्मेदार एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाती है।
रिपोर्टों और वायरल वीडियो के अनुसार, अव्यवस्था का यह दौर यात्रा शुरू होने से पहले ही दस्तक दे चुका था। 18 तारीख की फ्लाइट से पहले रिपोर्टिंग के दौरान भारी बारिश के कारण हज कमेटी का पूरा ग्राउंड पानी से लबालब हो गया था। हैरानी की बात यह रही कि जहां हाजियों को इस जलभराव के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था, वहीं जिम्मेदार अधिकारी सहायता के बजाय स्वागत समारोहों और फोटो खिंचवाने में व्यस्त दिखे। यात्रा शुरू होने के बाद भी हालात नहीं सुधरे। 6 घंटे की लंबी हवाई यात्रा के दौरान हाजियों को केवल औपचारिकता निभाने के लिए बेहद साधारण खाना दिया गया। यात्रियों का दावा है कि उन्हें चाय और पानी जैसी मूलभूत चीजों के लिए भी घंटों इंतजार करना पड़ा।
मदीना पहुंचने पर हाजियों की मुश्किलें और बढ़ गईं। वहां सामान प्रबंधन में भारी लापरवाही देखी गई। हाजियों का सामान गलत तरीके से दूसरे होटलों में भेज दिया गया, जिसे वापस पाने के लिए यात्रियों को कई दिनों तक भटकना पड़ा। जब सामान मिला, तब तक कई बैग बुरी तरह टूट चुके थे। इसके अलावा, सऊदी की कंपनी के नुसुक कार्ड बनवाने के लिए बुजुर्गों और महिलाओं को चिलचिलाती धूप में लंबी कतारों में घंटों खड़ा रहना पड़ा, जो उनके स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा साबित हुआ।
ठहराव की अवधि को लेकर भी हाजियों में भारी रोष है। नियमानुसार हाजियों को मदीना में 40 नमाजें पढ़ने का अवसर मिलना चाहिए, लेकिन आरोप है कि मात्र सात दिनों के भीतर ही उनसे होटल खाली करवा लिए गए। इसके बाद उन्हें अजीजिया इलाके की ऐसी इमारतों में शिफ्ट कर दिया गया जो बरसों से बंद पड़ी थीं। वायरल वीडियो में इन इमारतों की जर्जर स्थिति साफ देखी जा सकती है खराब लिफ्ट, बदहाल बाथरूम और साफ-सफाई का नामोनिशान नहीं। बताया जा रहा है कि इन बिल्डिंग्स की लिफ्ट 10 साल पुरानी हैं और ये साल में केवल हज के समय ही खोली जाती हैं, जिस कारण वहां रहना दुश्वार हो गया है।
आर्थिक मोर्चे पर भी हाजियों को झटका दिया गया है। उन पर आरोप लगाया गया है कि तेल के दाम बढ़ने का हवाला देकर अब प्रति हाजी 10 हजार रुपये अतिरिक्त मांगे जा रहे हैं। इन तमाम समस्याओं के बीच सबसे अधिक चिंता बीमार और बुजुर्ग हाजियों की स्थिति को लेकर है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कई हाजी बीमार और बेसहारा नजर आ रहे हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं है।
इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक मोड़ भी ले लिया है। जहां सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने हज कमेटी की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं, वहीं अन्य जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर हाजियों की सुरक्षा और सम्मान का जिम्मेदार कौन है? क्या लाखों रुपये लेने के बाद हज कमेटी को केवल पैसे वसूलने तक ही अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए या उन्हें हाजियों को सुरक्षित और सुलभ यात्रा प्रदान करने का अपना वादा भी निभाना चाहिए?

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