सहारनपुर। वार्ड नंबर 37 गिल कॉलोनी में आज एक बड़ा हादसा होते-होते बच गया। वेस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से गुजरने वाली एक तेज रफ्तार मालगाड़ी के भारी कंपन के कारण रेलवे लाइन के पास स्थित एक मकान की छत भरभरा कर गिर गई। घटना के समय कमरे में मौजूद युवक पांच मिनट पहले ही बाहर निकला था, जिससे उसकी जान बाल-बाल बच गई। इस घटना के बाद से स्थानीय निवासियों में रेलवे प्रशासन और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है।
स्थानीय पार्षद गौरव कपिल ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि वेस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से गुजरने वाली मालगाड़ियों की गति इतनी तेज होती है कि आसपास के घरों में भयानक कंपन (वाइब्रेशन) पैदा हो जाता है। आज भी जैसे ही एक मालगाड़ी तेज गति से गुजरी, वैसे ही स्थानीय निवासी प्रभजोत सिंह के घर की छत अचानक ढह गई। गनीमत रही कि प्रभजोत सिंह के भाई हादसे से ठीक 5 मिनट पहले ही उस कमरे से बाहर आए थे, अन्यथा कोई बड़ी जनहानि हो सकती थी। हालांकि, इस घटना में परिवार को भारी आर्थिक और मानसिक क्षति पहुंची है।
पार्षद और क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह समस्या केवल एक घर की नहीं है, बल्कि कॉरिडोर के किनारे बसे इस पूरे इलाके के सभी मकानों की स्थिति अत्यंत जर्जर हो चुकी है। तेज कंपन के कारण लगभग सभी घरों की दीवारों और छतों में गहरी दरारें आ चुकी हैं। घरों में रहने वाले बीमार और बुजुर्गों का कहना है कि जब भी यहां से मालगाड़ी गुजरती है, तो पूरा घर हिलने लगता है, जिससे वे हर वक्त दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं। स्थानीय नागरिकों ने बताया कि रेलवे विभाग द्वारा आबादी वाले इस क्षेत्र में सुरक्षा के लिए कोई दीवार या बैरिकेडिंग नहीं की गई है। इस लापरवाही के कारण लोग अनधिकृत रूप से और नियमों को ताक पर रखकर रेलवे लाइन पार करने को मजबूर हैं, जिससे आए दिन हादसे होते रहते हैं। अभी दो दिन पहले ही एक युवक ट्रेन की चपेट में आ गया था, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी।
सुरक्षा दीवार न होने के कारण अक्सर आवारा पशु भी पटरियों पर आ जाते हैं और तेज रफ्तार ट्रेनों की चपेट में आकर कट जाते हैं। पशुओं के शव समय पर न हटाए जाने के कारण पूरे क्षेत्र में असहनीय दुर्गंध फैल जाती है, जिससे स्थानीय आबादी में संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा लगातार बना रहता है। वार्डवासियों का आरोप है कि इससे पहले भी उन्होंने मीडिया और अन्य माध्यमों से अपनी आवाज प्रशासन तक पहुंचाने की कोशिश की थी, लेकिन उनकी मांगों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। इसी प्रशासनिक उदासीनता का नतीजा है कि आज एक मकान की छत गिर गई।
क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन और रेलवे विभाग से पुरजोर मांग की है कि गति सीमा तय होः पेपर मिल से लेकर मेला गुघाल के पुल तक, जब भी कोई मालगाड़ी इस शहरी/नगरीय क्षेत्र में प्रवेश करे, तो उसकी गति को अनिवार्य रूप से धीमा किया जाए ताकि कंपन कम हो। सुरक्षा दीवार का निर्माणः पूरे रिहायशी इलाके के साथ रेलवे ट्रैक के दोनों ओर पक्की सुरक्षा दीवार (बाउंड्री वॉल) बनाई जाए, जिससे लोग और पशु ट्रैक पर न आ सकें। प्रशासन को चेताने और अपनी मांगें रखने के लिए मौके पर भारी संख्या में लोग एकत्र हुए। इस दौरान गुरमीत सिंह, प्रभजोत सिंह, राजवीर सिंह, देवेंद्र कौर, जसविंदर कौर, हरप्रीत कौर, वर्षा चोपड़ा, उषा गुप्ता, प्रदीप चोपड़ा, अमरजीत सिंह, बलजीत सिंह, सुखवीर कौर और कुलदीप कौर सहित दर्जनों क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।
रेलवे ट्रैक पर सुरक्षा दीवार न होने से आए दिन हो रहे हादसे, दो दिन पहले युवक की मौत के बाद अब गिरा मकान, भड़के वार्डवासी