13 सूत्रीय मांगों को लेकर किसानों ने किया प्रदर्शन

Farmers staged a protest over 13-point demands.

सहारनपुर। किसान मजदूर संगठन के बैनर तले बड़ी संख्या में किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे। मूसलाधार बारिश के बीच किसानों ने डीएम कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया और सरकार व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम 13 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा, जिसमें समस्याओं का जल्द समाधान न होने पर आंदोलन को तेज करने की चेतावनी दी गई।
धरने को संबोधित करते हुए संगठन के पदाधिकारियों ने गन्ना किसानों के लंबित भुगतान का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि गागनौली, दया और बजाज शुगर मिलों पर किसानों का करोड़ों रुपये बकाया है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो रही है। किसानों ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार 14 दिन से अधिक की देरी पर ब्याज सहित भुगतान की मांग की। किसानों ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि किसानों की जमीन का अधिग्रहण मौजूदा सर्किल रेट पर किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि पहले सर्किल रेट बढ़ाया जाए और उसके बाद ही अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि किसानों का आर्थिक शोषण न हो।
ज्ञापन में जैविक खेती के लिए प्रति एकड़ 50 हजार रुपये का अनुदान, किसानों की पूर्ण कर्जमाफी और गन्ने का समर्थन मूल्य 550 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग शामिल थी। इसके अतिरिक्त, डीएपी और यूरिया की किल्लत समाप्त करने तथा मिलावटी खाद व दवाओं पर सख्त कार्रवाई की भी मांग की गई। किसानों ने हिण्डन, काली, कृष्णा और ढमोला जैसी नदियों को औद्योगिक प्रदूषण से बचाने की मांग की। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, किसानों व मजदूरों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा व चिकित्सा सुविधा प्रदान करने, 50 वर्ष से अधिक आयु के किसानों को 5 हजार रुपये मासिक पेंशन तथा स्नातक युवाओं को 1500 रुपये मासिक बेरोजगारी भत्ता देने की भी मांग उठाई।
संगठन ने गांवों के तालाबों को कब्जामुक्त कराने, पेयजल, बिजली और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने की मांग रखी। इसके साथ ही, आम उत्पादक क्षेत्र में मंडी स्थापित करने और आवारा पशुओं से फसलों की सुरक्षा के लिए एक ठोस नीति बनाने की भी मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बारिश उनके हौसले नहीं तोड़ सकती। किसान अपनी हक की लड़ाई लड़ता रहेगा और यदि सरकार ने मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई तो प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।

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