सहारनपुर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) सहारनपुर शाखा की मासिक वैज्ञानिक गोष्ठी का आयोजन दिल्ली रोड स्थित एक होटल के सभागार में किया गया। कार्यक्रम में पारस हॉस्पिटल, पंचकूला से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने टीबी और लीवर संबंधी बीमारियों के आधुनिक उपचार एवं जागरूकता पर विस्तृत जानकारी दी।
गोष्ठी में फेफड़ा रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित कुमार मंडल ने कहा कि टीबी के मरीजों को उपचार बीच में नहीं छोड़ना चाहिए। यदि मरीज दवा अधूरी छोड़ देते हैं तो टीबी के बैक्टीरिया में दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है, जिससे आगे का इलाज काफी जटिल हो जाता है। उन्होंने बताया कि यदि किसी मरीज के फेफड़े में गांठ दिखाई देती है तो उसकी सही और सटीक जांच ब्रोंकोस्कोपी के माध्यम से कराई जानी चाहिए।
वहीं, लीवर रोग विशेषज्ञ डॉ. राघव बंसल ने कहा कि गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त लीवर का प्रभावी उपचार लीवर ट्रांसप्लांट के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने बताया कि आधुनिक चिकित्सा तकनीकों की बदौलत लीवर ट्रांसप्लांट के बाद मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। उन्होंने जानकारी दी कि भारत में लगभग चार करोड़ लोग किसी न किसी प्रकार की लीवर बीमारी से पीड़ित हैं और हर वर्ष करीब 20 हजार मरीजों को लीवर ट्रांसप्लांट की आवश्यकता होती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. पूनम मखीजा ने की, जबकि आईएमए सहारनपुर के सचिव डॉ. नीरज आर्य ने अतिथियों का स्वागत किया। गोष्ठी का संचालन वैज्ञानिक सचिव डॉ. कलीम अहमद ने किया। इस अवसर पर डॉ. अनुपम मलिक, डॉ. सुधीर अग्रवाल, डॉ. पूनम कुमार, डॉ. सी.एस. चोपड़ा, डॉ. वंदना वर्मा, डॉ. अनिल मलिक, डॉ. सीमा अग्रवाल, डॉ. सुदर्शन नागपाल, डॉ. वी.एस. पुंडीर, डॉ. सौम्या जैन, डॉ. डी.के. गुप्ता, डॉ. महेश चंद्रा, डॉ. रजनीश सिंघल, डॉ. रविकांत, डॉ. प्रवीण मित्तल, डॉ. आर.एस. पंवार, डॉ. सफल कुमार, डॉ. एम.के. जैन, डॉ. सऊद हसन, डॉ. अंशुमन तिवारी, डॉ. खलीलुल्ला खान, डॉ. रजत बंसल सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक उपस्थित रहे।
आईएमए सहारनपुर की वैज्ञानिक गोष्ठी में टीबी और लीवर रोगों के उपचार पर विशेषज्ञों ने दी अहम जानकारी