सहारनपुर। 10 मोहर्रम 1448 हिजरी (26 जून 2026) को यौमे आशूरा के अवसर पर हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) और करबला के 72 शहीदों की याद में शहर में पारंपरिक मातमी जुलूस पूरे अकीदत और एहतराम के साथ निकाला गया। जुलूस बड़ी इमामबारगाह जाफर नवाज से शुरू होकर पुल सब्जी मंडी, जामा मस्जिद कलां (चौक फव्वारा), मोरगंज, भगत सिंह चौक, खुमरान रोड, पुरानी चुंगी और महाराज सिंह कॉलेज के सामने से होते हुए पुराना घास कांटा स्थित करबला पहुंचकर संपन्न हुआ।
जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। सबसे आगे ऊंट, घोड़े और झोटा बुग्गी पर सवार छोटे-छोटे बच्चे काले वस्त्र धारण कर हाथों में काले झंडे लिए चल रहे थे। जुलूस में ष्या हुसैनष्, ष्या अब्बासष्, ष्नारा-ए-हैदरी या अलीष्, ष्हुसैनियत जिंदाबादष् और ष्अल्लाहु अकबरष् के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। अंजुमन-ए-इमामिया, अंजुमन-ए-अकबरिया और सोगवारे अंजुमन-ए-अकबरिया के सदस्यों ने नौहाख्वानी और मातम कर करबला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
जामा मस्जिद कलां (चौक फव्वारा) पर हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सैय्यद तहकीक हुसैन रिजवी ने अपने संबोधन में हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) की कुर्बानी, इंसानियत, न्याय और सत्य के लिए दिए गए उनके संदेश पर विस्तार से प्रकाश डाला। इसके बाद जुलूस पुनः अपने निर्धारित मार्ग से करबला की ओर रवाना हुआ, जहां पहुंचकर अकीदतमंदों ने फाका खोला और मातम के साथ कार्यक्रम का समापन किया।
इससे पूर्व आशूरा की रात शहर के विभिन्न इमामबारगाहों में शब्बेदारी, मजलिस, मरसिया-ख्वानी, नौहाख्वानी और मातम का आयोजन किया गया। वहीं शाम को मजलिस-ए-शाम-ए-गरीबा में मौलाना जहूर मेहदी मौलाई ने करबला की घटना और शहादत के बाद अहलेबैत पर गुजरी कठिन परिस्थितियों का बयान किया, जिसे सुनकर मौजूद अकीदतमंद गमगीन हो उठे और मातम किया।
कार्यक्रम के अंत में शिया मुस्लिम समुदाय एवं आयोजकों ने मोहर्रम के सभी कार्यक्रमों को शांतिपूर्ण एवं सफल बनाने में सहयोग देने के लिए जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, नगर निगम, सिविल डिफेंस, मीडिया, सर्वधर्म एकता मंच तथा सभी समाजसेवियों का आभार व्यक्त किया।
यौमे आशूरा पर निकला भव्य मातमी जुलूस, करबला के शहीदों को अकीदत के साथ दी गई श्रद्धांजलि