मक्का/मदीना। मक्का शरीफ के अजीजिया क्षेत्र से हृदय विदारक तस्वीरें सामने आ रही हैं, जो भारतीय हज प्रबंधन और मुस्लिम नेतृत्व पर कड़े सवाल खड़े करती हैं। जहाँ एक ओर अन्य देशों के हाजी सुकून से अपनी इबादत कर रहे हैं, वहीं भारतीय हाजी दो जून की रोटी के लिए भीषण गर्मी में घंटों लंबी लाइनों में लगने को मजबूर हैं।
महंगा दाम, घटिया क्वालिटी, हाजियों की दोहरी मार
हज यात्रा पर इस बार खाना पकाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, लेकिन इसके विकल्प के रूप में भारतीय हाजियों के लिए सरकारी स्तर पर भोजन की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं की गई। इसका सीधा असर हाजियों की जेब और सेहत पर पड़ रहा है। होटलों में खाने की कीमतें अचानक दोगुनी हो गई हैं, जबकि खाने की क्वालिटी और मात्रा आधी कर दी गई है। बुजुर्ग हाजियों और महिलाओं को घंटों लाइन में लगने के बाद भी सामान्य स्तर का भोजन नसीब नहीं हो पा रहा है।
पड़ोसी देशों से पिछड़ी भारतीय व्यवस्था
चौंकाने वाली बात यह है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, इंडोनेशिया और तुर्किये जैसे देशों ने अपने हाजियों के लिए होटलों में ही बुफे सिस्टम, चाय और नाश्ते की शानदार व्यवस्था की है। भारतीय हाजियों का सवाल है कि जब उनसे ट्रेनिंग और अन्य सरकारी शुल्क पूरे लिए जाते हैं, तो उन्हें अन्य देशों की तरह बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं दी गईं?
मुस्लिम लीडरशिप और संस्थाओं की चुप्पी पर उठे सवाल
यह संकट केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक नेतृत्व की नाकामी भी माना जा रहा है। आरोप लग रहे हैं कि सांसद और विधायक जिन नेताओं को मुस्लिम समाज अपनी आवाज बुलंद करने के लिए चुनता है, उन्होंने संसद या सरकार के सामने इस मुद्दे को समय रहते क्यों नहीं उठाया?
हज कमेटी और संगठनः भारतीय हज कमेटी, जमीयत उलेमा-ए-हिंद और अन्य बड़े संगठनों ने केवल औपचारिक बयानबाजी की, जबकि जमीन पर हाजियों के लिए कोई ठोस पैरवी नहीं की गई।
सम्मानजनक हज की मांग
हाजियों के परिवारों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि हज केवल एक रस्म नहीं, बल्कि रूहानी सुकून का सफर है। सरकार और संबंधित संस्थाओं से मांग की जा रही है कि आगामी वर्षों में अन्य देशों की तर्ज पर बुफे सिस्टम अनिवार्य किया जाए। भारतीय हाजियों के स्वाद के अनुसार भारतीय रसोइयों के जरिए भोजन की व्यवस्था हो। खाने की कीमतों पर सरकारी नियंत्रण और निगरानी रहे ताकि हाजियों का शोषण न हो।
मक्का की सड़कों पर लगी यह लाइनें मुफ्त खाने की नहीं, बल्कि हक के पैसे देकर अपमानित होने की गवाह हैं। यदि समय रहते मुस्लिम नेतृत्व और सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया, तो भारतीय हज यात्रा की साख को और अधिक गहरा धक्का लग सकता है। यह मामला अब केवल सुविधाओं का नहीं, बल्कि भारतीय हाजियों के आत्मसम्मान और उनकी धार्मिक यात्रा की शुचिता का बन चुका है।