श्रीमद्भागवत कथाः भक्ति के रंग में डूबा सहारनपुर

Shrimad Bhagavat Katha: Saharanpur Immersed in the Colors of Devotion

सहारनपुर। श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन कथा व्यास आचार्य श्री हरिओम ने अवगत कराया कि आज की कथा ’महारास कथा’, ’श्रीकृष्ण मथुरा आगमन’ और श्री रुक्मणि विवाह महोत्सव’ पर आधारित है।
कथा व्यास महाराज ने अपने श्रीमुख से आज की कथा विषय बिंदुओं को श्रीमद् भागवत कथा के संदर्भ मे अनेकों प्रसंगों के साथ समझाया कि महारास कथा 16 विभिन्न कलाओं से परिपूर्ण भगवान श्रीकृष्ण अवतार से संबंधित कथा है जो कि मुख्यतः आनंद प्रधान कथा है, भगवान श्रीकृष्ण से साक्षात् प्राप्ति की कथा है। दृष्टांतो के साथ वर्णित किया कि ’रास’ का वास्तविक अर्थ है ’रसों का समूह’ और परमब्रह्म श्रीकृष्ण जी की ’रसमयी क्रीड़ाओं के समूह को रास कहा गया है’ ।
भगवान श्रीकृष्ण की मधुर रस लीला ’श्रृंगार और रस’ से पूर्ण उनकी ’दिव्य रास क्रीड़ा’ है, जिसमें आनंद भाव का पूर्ण विकास है, उल्लास हैं और इस स्थूल जगत की प्रेम और वासना से पूर्णतया विमुक्त है। माना जाता है शरद पूर्णिमा उत्सव उपासना और आराधना का दिवस हैं जो सीधा आत्मा को परमात्मा से जोड़ता है। इस विशेष दिन ही भगवान श्रीकृष्ण ने यमुना के तट पर गोपियों के साथ रास क्रियाओं के साथ ’महारास’ किया था। कथा वाचन में कथा व्यास जी को आचार्य सचिन भारद्वाज, आचार्य अमित, आचार्य भीम, आचार्य अनुज पांडे, पंडित राकेश मोहन काला , आचार्य कन्हैया जी का विशेष सहयोग रहा। आज की कथा आयोजन को व्यवस्थित रूप से सफलता और सुंदरता प्रदान करने में अरुण जिंदल, वेद प्रकाश तायल, विजयपाल एडवोकेट, सतीश कुमार, विपिन कुमार, गुरमीत अरोरा, जितेंद्र यादव, पीयूष शर्मा, डा हरदेव सैनी, वंश शर्मा, इंद्रा कपिल, अन्नू गोयल, वजन्ती देवी, सोनिया चौधरी, दीपक कुमार, आदि का विशेष योगदान रहा।

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