सहारनपुर। स्थानीय बाबा अमरनाथ मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन भक्ति और ज्ञान की गंगा बही। कथा व्यास आचार्य श्री हरिओम जी ने कपिल मुनि-देवहूति संवाद और भक्त ध्रुव के चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया। इस दौरान करीब 150 महिला-पुरुष श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ कमाया।
कथा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आचार्य श्री हरिओम जी ने कहा कि संसार रूपी समुद्र में माता देवहूति ने समस्त भौतिक सुखों को प्राप्त करने के बाद भी मन की शांति के लिए अपने पुत्र महर्षि कपिल मुनि की शरण ली थी। उन्होंने बताया कि मन की भूख इतनी बड़ी है कि इसे संसार के मोह-जाल से कभी नहीं भरा जा सकता। विषय भोगों के पीछे भागना अविवेक है क्योंकि वे स्वयं अपूर्ण हैं। जीव के बंधन और मोक्ष का एकमात्र कारण उसका मन है।
आचार्य ने श्रद्धालुओं को सीख देते हुए कहा कि जब मनुष्य अपने मन में श्रद्धापूर्वक श्मदन मोहनश् को विराजमान कर लेता है, तो मन स्वतः ही तृप्त हो जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मन की पूर्णता और शांति केवल श्री गोविंद की भक्ति, श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण और गीता के पाठन से ही संभव है। इससे पूर्व, प्रातःकालीन पूजन और सायंकालीन कथा का शुभारंभ मुख्य अतिथि माँ शाकुंभरी विश्वविद्यालय के क्रीड़ा अधिकारी प्रोफेसर डॉक्टर संदीप गुप्ता ने किया। उन्होंने कथा व्यास आचार्य श्री हरिओम जी को माल्यार्पण एवं शॉल ओढ़ाकर उनका अभिनंदन किया। कथा के सफल संचालन में पंडित सचिन भारद्वाज, आचार्य अमित, भीम, कन्हैया, अनुज पांडे और कार्तिक जी का विशेष सहयोग रहा।
कार्यक्रम को भव्य बनाने में मंदिर समिति की महिला सदस्य प्रतिभा, पप्पी, राशि, मनीषा, ललिता यादव और सोनिया ने सक्रिय भूमिका निभाई। इस अवसर पर संस्था संरक्षक अरुण जिंदल, अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार गुप्ता, सचिव विजय खुराना, कोषाध्यक्ष विजय शंकर शर्मा, सतीश जी, वेद प्रकाश, दीपक कपूर (पीएनबी), अनुज पुंडीर, दीपक अरोरा, जितेंद्र यादव और गुलशन ठक्कर सहित भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कपिल मुनि-देवहूति संवाद और भक्त धु्रव के प्रसंग पर भावविभोर हुए श्रद्धालु