सहारनपुर। गिल कॉलोनी वार्ड क्षेत्र में रेलवे के फ्रेट कॉरिडोर से गुजरने वाली मालगाड़ियों की तेज रफ्तार और उससे पैदा होने वाले भयंकर कंपन के कारण क्षेत्रवासी दहशत के साए में जीने को मजबूर हैं। इसी गंभीर समस्या को लेकर आज क्षेत्रवासी स्थानीय पार्षद गौरव कपिल के नेतृत्व में जिलाधिकारी से मिलने कलेक्ट्रेट पहुंचे। जिलाधिकारी की अनुपस्थिति में शिष्टमंडल ने सिटी मजिस्ट्रेट से मुलाकात कर उन्हें एक शिकायती पत्र सौंपा और जल्द कार्रवाई की मांग की।
पार्षद गौरव कपिल ने सिटी मजिस्ट्रेट को बताया कि फ्रेट कॉरिडोर से गुजरने वाली मालगाड़ियों की गति इतनी तेज होती है कि पूरे क्षेत्र के मकानों में तीव्र कंपन होता है। इस कंपन की वजह से आसपास के लगभग सभी घरों की दीवारों में गहरी दरारें आ चुकी हैं। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि कल ही क्षेत्र के निवासी प्रभजोत सिंह के मकान की छत भरभरा कर गिर गई। गनीमत रही कि उनके भाई हादसे से ठीक 5 मिनट पहले ही वहां से निकले थे, अन्यथा कोई बड़ा और दुखद हादसा हो सकता था।
पार्षद और क्षेत्रवासियों ने आरोप लगाया कि रेलवे विभाग द्वारा इस संवेदनशील रिहायशी इलाके में सुरक्षा के लिहाज से कोई दीवार (बाउंड्री वॉल) भी नहीं बनाई गई है, जिससे आए दिन दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है। क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि पेपर मिल से लेकर गत्ता मिल के मध्य से गुजरने वाली मालगाड़ियों की गति को तुरंत नियंत्रित (कम) किया जाए, ताकि भविष्य में किसी जान-माल के नुकसान को रोका जा सके और लोगों को इस खौफ से मुक्ति मिले।
सिटी मजिस्ट्रेट ने पूरे मामले को बेहद गंभीरता से सुना। उन्होंने आश्चर्य और दुख व्यक्त करते हुए बताया कि पूर्व में भी उनके द्वारा स्वयं इस क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया गया था और रेलवे विभाग को आवश्यक कदम उठाने के लिए पत्र भी लिखा गया था, लेकिन रेलवे द्वारा अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई जो कि बेहद चिंताजनक है। सिटी मजिस्ट्रेट ने पीड़ितों को आश्वस्त किया कि प्रशासन इस मामले में पुनः रेलवे विभाग से कड़ा पत्राचार करेगा और क्षेत्रवासियों की सुरक्षा के लिए जल्द से जल्द समस्या का समाधान कराया जाएगा। इस दौरान मुख्य रूप से हरप्रीत कौर, गुरमीत सिंह, देवेंद्र कौर, राजवीर सिंह, जसविंदर कौर, कुलदीप कौर, सुखबीर कौर, बलजीत सिंह, अमरजीत सिंह सहित भारी संख्या में गिल कॉलोनी के निवासी मौजूद रहे।
गिल कॉलोनी में भरभरा कर गिरी मकान की छत, बाल-बाल बची जान