गुरु के बिना दिशाहीन है मनुष्य का जीवन

Without a Guru, human life is directionless.

सहारनपुर। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा आयोजित साप्ताहिक सत्संग में सर्वश्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी बहनों ने अपने प्रेरणादायक प्रवचनों के माध्यम से गुरु की महिमा का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि बिना गुरु के मनुष्य का जीवन उस नाव के समान है जो बिना मल्लाह के दिशा विहीन होकर चल रही हो। ऐसी नाव कब और किस दिशा में मुड़ जाए तथा अपने मार्ग से भटक जाए, इसका कोई निश्चित अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
इसी प्रकार गुरु के अभाव में मनुष्य का जीवन भी अस्थिर एवं भटकाव से भरा रहता है। जब तक जीवन में एक पूर्ण संत का आगमन नहीं होता, तब तक व्यक्ति सही मार्ग को पहचान नहीं पाता। प्रवचन के दौरान एक सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कहा गया कि जैसे जंगल में खिलने वाले फूल बिना किसी माली के संरक्षण के होते हैं। वे चाहे किसी भी मिट्टी में क्यों न खिलें, परंतु तेज आंधी या तूफान आने पर वे आसानी से नष्ट हो जाते हैं और उनका अस्तित्व समाप्त हो जाता है, क्योंकि उनके ऊपर किसी माली का संरक्षण नहीं होता।
इसके विपरीत जिन फूलों पर माली का हाथ होता है, वे बाग में सुरक्षित रूप से खिलते हैं, उनकी देखभाल होती है और वे मूल्यवान बन जाते हैं। ठीक उसी प्रकार जिस मनुष्य के जीवन में पूर्ण सतगुरु का सान्निध्य होता है, उसका जीवन भी सुरक्षित, संतुलित और सार्थक बन जाता है। वह हर परिस्थिति में गुरु को स्मरण करता है और जीवन की कठिनाइयों का सामना दृढ़ता से करता है। साध्वी बहनों ने आगे कहा कि जहां संसार के रिश्ते-नाते कई बार साथ छोड़ देते हैं। वहीं गुरु एक अंगरक्षक की भांति हर परिस्थिति में अपने शिष्य के साथ खड़े रहते हैं। हमारे शास्त्रों एवं ग्रंथों में भी गुरु की महिमा “नेति-नेति” कहकर गाई गई है, अर्थात गुरु की महिमा का पूर्ण वर्णन शब्दों में संभव नहीं है। सत्संग के अंत में सभी श्रद्धालुओं को गुरु के सान्निध्य में रहकर जीवन को सफल बनाने का संदेश दिया गया।

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