विकसित भारत 2047 पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

Two-day national seminar on Developed India 2047 inaugurated

सहारनपुर। जे.वी. जैन कॉलेज के स्ववित्त पोषित विभाग द्वारा विकसित भारत 2047- एक राष्ट्र अनन्त क्षितिजः हर क्षेत्र को बदलने के लिए अभिसारी विचार विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का गरिमामय शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ मुख्य संरक्षक व माँ शाकुम्भरी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. विमला वाई, संरक्षक डॉ. आई.सी. जैन, मुख्य अतिथि प्रो. मिली पन्त, मुख्य वक्ता प्रो. मनोज दिवाकर और प्राचार्य प्रो. वकुल बंसल द्वारा किया गया।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. विमला वाई ने महाविद्यालय के इस प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत जिस गति से आगे बढ़ रहा है, हम 2047 से पहले ही विकसित राष्ट्र का लक्ष्य प्राप्त कर लेंगे। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि आर्थिक और तकनीकी प्रगति के साथ-साथ हमें पर्यावरण की सुरक्षा और अपने नैतिक मूल्यों को बचाए रखना भी अनिवार्य है।
आईआईटी रूड़की की प्रो. मिली पंत ने हरित विकास और सामाजिक समावेशन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति (एनईपी-2020) इस लक्ष्य की प्राप्ति में मील का पत्थर साबित होगी। वहीं, श्रछन् के प्रो. मनोज दिवाकर ने विकसित देशों के प्रारूप को समझने, प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने और कृषि व महिला सशक्तिकरण को विकास की मुख्य धुरी बताया।
उद्घाटन सत्र के बाद विभिन्न तकनीकी सत्रों का आयोजन हुआ, जिसमें विज्ञान, मानविकी, वाणिज्य और विधि जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। विज्ञान एवं इंजीनियरिंगः डॉ. प्रियंका त्यागी और डॉ. अल्का हरित की अध्यक्षता में सत्र संपन्न हुए। मानविकी एवं कलाः प्रो. आभा सैनी और डॉ. वर्चसा सैनी ने सत्रों का नेतृत्व किया। वाणिज्य एवं प्रबंधनः प्रो. राजबीर सिंह और डॉ. आलोक यादव की अध्यक्षता में शोध पत्र पढ़े गए। ऑनलाइन सत्रः प्रो. पूनम खरे की अध्यक्षता में देश-विदेश के शोधार्थियों ने वर्चुअली प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. मनु गुप्ता ने किया और अंत में प्राचार्य प्रो. वकुल बंसल ने सभी अतिथियों व शोधार्थियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रो. लोकेश कुमार, प्रो. शुभ्रा चतुर्वेदी, प्रो. वंदना रूहेला सहित महाविद्यालय का समस्त स्टाफ और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।

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