सहारनपुर। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के तत्वावधान में पंत विहार स्थित सत्संग आश्रम में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर सत्संग का लाभ प्राप्त किया।
इस अवसर पर आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी सुषिला भारती ने अपने आध्यात्मिक प्रवचनों में सिखों के तृतीय गुरु श्री गुरु अमर दास के समय का एक प्रेरणादायक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि गुरु महाराज के परम सेवक भाई प्रेमा जन्म से ही पैरों से दिव्यांग थे, फिर भी वे प्रतिदिन गुरु सेवा एवं सत्संग में पूरे समर्पण के साथ उपस्थित होते थे। समाज के लोग अक्सर उनका उपहास उड़ाते हुए कहते थे कि यदि उनका गुरु पूर्ण है तो उनके पैर क्यों नहीं ठीक कर देता। किंतु भाई प्रेमा ने कभी भी अपने गुरु से सांसारिक लाभ की याचना नहीं की और सदैव अपने शिष्य धर्म का पालन करते रहे।
एक दिन जब वे गुरु दरबार में विलंब से पहुँचे तो गुरु महाराज ने कारण पूछा। भाई प्रेमा ने लोगों के तानों का उल्लेख किया। तब गुरु महाराज ने उन्हें एक फकीर के पास भेजा। जब भाई प्रेमा ने फकीर से अपने पैरों को ठीक करने का आग्रह किया और बताया कि उन्हें गुरु महाराज ने भेजा है, तो फकीर क्रोधित होकर लाठी लेकर उनके पीछे दौड़ पड़ा। भयवश भाई प्रेमा भी दौड़ने लगे। कुछ दूर जाकर उन्हें अनुभव हुआ कि वे अपने पैरों पर बिल्कुल सामान्य व्यक्ति की तरह दौड़ रहे हैं। इस प्रकार गुरु कृपा से उनका जीवन बदल गया। साध्वी सुषिला भारती ने कहा कि यह प्रसंग हमें सिखाता है कि सच्चे शिष्य का विश्वास, समर्पण और गुरु के प्रति अटूट श्रद्धा ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति होती है। जब शिष्य निष्काम भाव से गुरु की शरण में रहता है, तब गुरु कृपा से असंभव भी संभव हो जाता है। सत्संग के उपरांत सभी श्रद्धालुओं ने विश्व शांति, मानव कल्याण एवं आध्यात्मिक उत्थान की प्रार्थना की तथा प्रसाद ग्रहण किया।
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान का साप्ताहिक सत्संग संपन्न, गुरु महिमा के प्रसंग से सराबोर हुए श्रद्धालु