सहारनपुर। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने आज कहा कि उन्हें अपनी गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा के दौरान हिंदुओं का गौमाता को लेकर अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है। 3 मई को गोरखपुर से शुरू की गई 81 दिनी इस यात्रा के वक्त उन्हें लगता था कि आज के आधुनिक समय में हिंदू समाज में गौमाता को लेकर उनकी धारणा बदल गई होगी। लेकिन 225 विधानसभा क्षेत्रों में उन्हें बहुत ही आश्चर्यजनक रूप से अनुभव हुआ कि उत्तर प्रदेश का हिंदू समाज बहुत गहरे अंतरमन से गौमाता से गहरी श्रद्धा और लगाव रखता है और उसकी प्रबल मांग है कि हिंदू हितों का उद्घोष कर सत्ता में दसों साल से केंद्र और प्रदेश में बनी हुई भाजपा सरकारें गौमाता को अवश्य ही राष्ट्रमाता अथवा प्रदेश में राज्यमाता का दर्जा देने का काम करेंगी परंतु ऐसा नहीं हुआ है। पहले ये लोग प्रचार करते थे कि ईसाइयों, मुसलमानों आदि की विरोध को देखते हुए ऐसा करना मुश्किल है लेकिन अब तो ईसाई हो या मुसलमान सभी हिंदुओं के स्वर में स्वर मिलाकर गौमाता को उसका उचित स्थान सम्मान और संरक्षण देने की बातें जोर-शोर से कर रहे हैं।
उन्होंने इस सवाल पर कि सपा और कांग्रेस उनकी यात्रा को पूरा समर्थन और संरक्षण दे रही है कहा कि उन्हें सभी का समर्थन मिल रहा है। उन्होंने किसी भी पार्टी विशेष से समर्थन नहीं मांगा है। उन्होंने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनावों में गौमाता सबसे प्रमुख मुद्दा बनेगी। जो इसका समर्थन करेंगे उन्हीं को हमें वोट और समर्थन देना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा 22 जुलाई को लखनऊ में पहुंचेगी और 24 जुलाई तक यदि सरकार ने गौमाता को राज्यमाता का दर्जा नहीं दिया तो वे 24 जुलाई को लखनऊ में विशाल जनसभा का आयोजन कर आगे के अभियान की घोषणा करेंगे। उन्होंने अयोध्या के राममंदिर में चढ़ावा चोरी मामले पर कहा कि उनके गुरू महान संत जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज राममंदिर आंदोलन के निर्माण के दौरान लगातार ये कहते थे कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस मंदिर पर अपना कब्जा कर लेगा और उनकी यह बात सच साबित हुई है कि संघ ने श्रीराम मंदिर को अपना कार्यालय बना लिया है। उन्हें आशा है कि सरकार दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देगी और उनके कब्जे से चोरी की पूरी रकम, सोने चांदी के जेवरात बरामद करेगी। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दो दिनो के दौरान सहारनपुर मंडल की सभी 16 विधानसभा क्षेत्रों की सघनता के साथ यात्रा की। इस यात्रा के दौरान संघ और भाजपा के लोगों ने उनसे पूरी तरह से दूरी बनाकर रखी। पुलिस प्रशासन भी उनकी पूरी यात्रा के दौरान उदासीन दिखा। दिलचस्प यह है कि सपा और कांग्रेस के हिंदू ही नहीं मुस्लिमों ने भी उनकी यात्रा और खुद शंकराचार्य का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया और उसमें पूरी तरह से भागीदारी की। पुलिस वालों पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कुछ अलग नहीं सोचते हैं और वह अपनी यात्रा को पूरी तरह से सफल मानते हैं। उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान जगह-जगह पर अपने प्रतिनिधियों की नियुक्ति भी की और उन्हें अपने उद्देश्यों की जानकारी भी दी।
2027 के चुनाव में गौमाता बनेगी सबसे बड़ा मुद्दाः स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद