मेयर और निगम प्रशासन पर भड़के नामित पार्षद, लगाया सौतेले व्यवहार का आरोप

Nominated councilors lash out at the Mayor and municipal administration, alleging discriminatory treatment.

सहारनपुर। सहारनपुर नगर निगम के नामित पार्षदों ने मेयर (महापौर) एवं निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए गहरी नाराजगी जताई है। पार्षदों का आरोप है कि निगम द्वारा क्षेत्र में कराए जा रहे विकास कार्यों और सड़कों के उद्घाटन कार्यक्रमों में उन्हें जानबूझकर आमंत्रित नहीं किया जा रहा है, जो कि पूरी तरह से भेदभावपूर्ण है।
नामित पार्षदों ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि मनोनीत होने के बाद उनका शपथ ग्रहण कार्यक्रम भी मात्र एक औपचारिकता निभाकर पूरा कर दिया गया। इतना ही नहीं, आज तक संबंधित वार्डों में नामित पार्षदों के नाम के बोर्ड तक नहीं लगवाए गए हैं। बोर्ड न होने के कारण क्षेत्रीय जनता को यह पता ही नहीं चल पाता कि उनके क्षेत्र का नामित पार्षद कौन है और वे अपनी समस्याओं को लेकर किसके पास जाएं।
पार्षदों ने खेद जताते हुए कहा कि मेयर महोदय द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में नामित पार्षदों के मौजूद रहने के बावजूद, सोशल मीडिया पर डाली जाने वाली आधिकारिक पोस्टों में उनका नाम या उल्लेख तक नहीं किया जाता। इसके अलावा मेयर द्वारा आज तक नामित पार्षदों का परिचय निगम के आला अधिकारियों से भी नहीं कराया गया है। नतीजा यह है कि जब भी वे जनता के काम कराने के लिए अधिकारियों के पास जाते हैं, तो उन्हें पहचान और काम के लिए भारी जद्दोजहद करनी पड़ती है।
नामित पार्षदों ने मेयर पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि जब उन्होंने इस भेदभावपूर्ण रवैये को लेकर मेयर साहब से सीधे बात की, तो उन्हें बेहद अजीब जवाब मिला। मेयर ने कहा, आपको संगठन ने बनवाया है तो संगठन का काम करो, निगम के कामों में क्यों पड़ रहे हो।ष् पार्षदों का कहना है कि यह बयान न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि जनसेवा की मूल भावना के भी बिल्कुल विपरीत है। नामित पार्षदों ने साफ शब्दों में कहा कि वे जनता के प्रतिनिधि हैं और जनता के हक की आवाज उठाना तथा उनके विकास कार्य कराना उनका मुख्य दायित्व है। उन्होंने मांग की है कि नगर निगम के हर कार्यक्रम, सरकारी योजना और विकास कार्य में उनकी भागीदारी को अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए। पार्षदों ने चेतावनी दी है कि यदि इस भेदभावपूर्ण और उपेक्षित रवैये में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो सभी नामित पार्षद सामूहिक रूप से आगे की रणनीति तय कर बड़ा कदम उठाने को बाध्य होंगे।

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