रेलवे निजीकरण के विरोध में यूनियन का हल्लाबोल, स्टेशन पर रोष दिवस मनाकर बुलंद की आवाज

Unions protest against railway privatization, raising voice by observing a day of rage at the station

सहारनपुर। यूनियन के पदाधिकारी ने रेलवे स्टेशन पर गेट मीटिंग का आयोजन किया और रोष दिवस मनाया। यूनियन का आरोप है कि सरकारी तंत्र रेलवे के विभिन्न कार्यों का निजीकरण करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिससे कर्मचारियों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यूनियन नेताओं ने कहा कि रेलवे के नियमित कार्य जैसे ट्रैक सिग्नल, इंजन-कोच रिपेयर, वातानुकूलित कोच मेंटेनेंस, टिकट बुकिंग और आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्य ठेकेदारों को दिए जा रहे हैं, जो कर्मचारियों के हितों के खिलाफ है।
रोष सप्ताह के दौरान यूनियन ने कई प्रमुख मांगें उठाई हैं, जिनमें पुरानी पेंशन योजना की बहाली, कोविड काल में फ्रीज की गई महंगाई भत्ते की तीन किस्तों का भुगतान, ठेकेदारी प्रथा पर रोक लगाकर रिक्त पदों को शीघ्र भरना, बढ़े हुए कार्यभार के अनुसार नए पदों का सृजन, तथा आठवें वेतन आयोग में 3.5 फिटमेंट फैक्टर लागू करना शामिल है। इसके अलावा यूनियन ने रेलवे में अप्रेंटिस कर चुके युवाओं को नौकरी देने, लार्जर स्कीम को पुनः लागू करने, तकनीकी व अन्य कैटेगरी के कर्मचारियों को 10 हजार रुपये वर्दी भत्ता देने, लंबित रिस्क भत्ते का शीघ्र भुगतान करने तथा विभिन्न पदों की लंबित अपग्रेडिंग को लागू करने की भी मांग की है।
यूनियन ने यह भी कहा कि आगामी वेतन आयोग में न्यूनतम और अधिकतम वेतनमान के अंतर को कम किया जाए तथा रेलवे आवासों की जर्जर स्थिति में सुधार किया जाए। इस दौरान आयोजित गेट मीटिंग में संगठन से उपेंद्र गुप्ता के नेतृत्व में बाबूराम, रविन्द्र, सुरेन्द्र, राजेन्द्र, गुरदीप, विवेक कुमार, बालकिशन, रवि मेहरा, उपेन्द्र गुप्ता, संजय, राजन वत्स, मनोज सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

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