सहारनपुर। रेलवे रोड स्थित जनमंच सभागार में रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में राष्ट्र निर्माण और सामाजिक पुनर्जागरण का अनूठा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में वक्ताओं ने भारत के गौरवशाली अतीत को याद करते हुए भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए पंच परिवर्तन का मंत्र दिया।
मुख्य वक्ता अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी ने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि साहस और संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। स्वर्ण युग का स्मरणः उन्होंने मौर्य साम्राज्य और गुप्त काल को भारत का स्वर्ण युग बताते हुए महाराणा प्रताप, शिवाजी महाराज और पृथ्वीराज चौहान के संघर्षों को रेखांकित किया।
शिक्षा और इतिहासः उन्होंने चिंता व्यक्त की कि वर्तमान शिक्षा पद्धति पर अब भी औपनिवेशिक प्रभाव है। बच्चों को भारत का वास्तविक और गौरवशाली इतिहास पढ़ाना समय की मांग है। उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के लिए समान नीति, पलायन रोकने हेतु हिंदू समाज द्वारा संसाधनों का प्रबंधन और संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया। उन्होंने आह्वान किया कि संघ के विरुद्ध बनाए जा रहे भ्रामक नैरेटिव का जवाब समाज को एकजुट होकर देना होगा। प्रांत सह बौद्धिक शिक्षण प्रमुख सुनील जी ने संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में ष्पंच परिवर्तनष् के संकल्प को विस्तार से समझाया। उन्होंने राष्ट्र निर्माण के लिए निम्नलिखित पांच आयामों को आवश्यक बताया कि सामाजिक समरसताः भेदभाव मुक्त समाज, कुटुंब प्रबोधनः पारिवारिक मूल्यों का संरक्षण। प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी। अपनी संस्कृति पर आधारित दिनचर्या। नागरिक कर्तव्यः अधिकारों से पहले कर्तव्यों का बोध।गोष्ठी के दौरान संवाद सत्र में चौधरी रणधीर सिंह द्वारा डेमोग्राफी और वकालत क्षेत्र के प्रतिनिधित्व पर पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए प्रदीप जोशी जी ने कहा कि वकीलों को समाज में अपनी सक्रियता बढ़ानी होगी। उन्होंने एक महत्वपूर्ण सूत्र देते हुए कहा कि समाज को अब राजनीतिक ऑडिट के स्थान पर श्सामाजिक ऑडिटश् करने की आदत डालनी चाहिए।
कार्यक्रम का शुभारंभ विभाग संघचालक राकेश वीर, महानगर संघचालक अशोक और कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. अनिल मलिक द्वारा भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया। मंच पर और सभागार में विभाग प्रचारक आशुतोष, विभाग कार्यवाह अरविंद त्यागी, महानगर कार्यवाह रमेश, महानगर प्रचारक कविंद्र, देवेंद्र बंसल, सुधाकर अग्रवाल, डॉ. मिली पंत, निधि राणा, सुरेंद्र अग्रवाल, रविंद्र मिगलानी, अनूप खन्ना, सरिता भाटिया, डॉ. विकास पंवार सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और स्वयंसेवक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन हरीश ने किया। अंत में वंदेमातरम के सामूहिक गान और भारत माता की जय के उद्घोष से पूरा सभागार गुंजायमान हो उठा। यह आयोजन सहारनपुर महानगर के वैचारिक विमर्श के इतिहास में एक मील का पत्थर सिद्ध हुआ।
पंच परिवर्तन से होगा राष्ट्र का पुनरुत्थान, जनमंच में गूंजा राष्ट्रवाद का स्वर