छात्रो ने सीखा गोबर से प्राकृतिक पेंट और उत्पाद बनाना

Students learned to make natural paint and products from cow dung.

सहारनपुर। नगर निगम सहारनपुर द्वारा संचालित माँ शाकंभरी कान्हा उपवन गोशाला में आज अनेक महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों को गोवंश के महत्व और गो-आधारित कुटीर उद्योगों के बारे में व्यवहारिक जानकारी दी गयी, जिससे भ्रमणकारी विद्यार्थी बेहद उत्साहित और हर्षित नजर आए।
एरॉन एजूकेशन वेलफेयर सोसायटी के तत्वाधान में गौशाला पहुंचे यूपीईएस यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी, ऐमिटी यूनिवर्सिटी तथा लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों ने गोशाला में गाय के गोबर और गोमूत्र से बनने वाले विभिन्न दैनिक उपयोगी व पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों को बनते हुए देखा। बच्चों ने सीखा कि कैसे गोबर से आकर्षक दीये, राखियाँ, तिरंगा चेस्ट बैज, धूपबत्ती, गो-काष्ठ (लकड़ी का विकल्प) और गौमय प्राकृतिक पेंट का निर्माण किया जाता है। इसके अलावा, गोमूत्र से फिनायल बनाने की प्रक्रिया भी विद्यार्थियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। ये विद्यार्थी एरॉन सोसायटी के साथ इंटर्नशिप कर रहे हैं। गोशाला प्रभारी डॉ. संदीप कुमार मिश्र ने उक्त विद्यार्थियों को गोशाला की व्यवस्थाओं और गोवंश संरक्षण की आवश्यकता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गोशालाएँ केवल पशु आश्रय नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण का एक बड़ा केंद्र बन सकती हैं। यह जानकर विद्यार्थीं आश्चर्य चकित रह गए कि निगम की कान्हा गौशाला विश्व की अकेली ऐसी गौशाला है जिसे 26 से अधिक गोमय उत्पाद बनाने के लिए राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।
इस अवसर पर मनोरंजन और उन्हें पारंपरिक संस्कृति से जोड़ने के लिए विद्यार्थियों को मॉडर्न बुलक कार्ट (आधुनिक बैलगाड़ी) की सवारी कराई गई, जिसका उन्होंने भरपूर आनंद लिया। इसके साथ ही विद्यार्थियों ने गोवंश को अपने हाथों से हरा चारा खिलाकर गो-सेवा का पुण्य लाभ अर्जित किया और जीव दया का संकल्प लिया। इस अवसर पर मुख्य रूप से योगाचार्य अनीता शर्मा, ऑरोन सोसायटी की निदेशक रश्मि टेरेंस आदि उपस्थित रहे।

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