सहारनपुर। समाज सेवी सुधीर शर्मा द्वारा कथा व्यास आचार्य हरिओम एवं उनकी टीम के माल्यार्पण और तिलक वंदन के साथ आज की कथा का विधिवत शुभारंभ हुआ। श्रीमद्भागवत कथा के सातवें और अंतिम दिन आचार्य हरिओम ने सुदामा चरित्र और राजा परीक्षित मोक्ष की कथा सुनाकर उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कथा व्यास ने बताया कि राजा परीक्षित के मन से मृत्यु का भय समाप्त करने के लिए शुकदेव ने उन्हें 7 दिनों तक भागवत कथा का श्रवण कराया था। श्रृंग ऋषि के श्रापवश तक्षक नाग के डसने के बाद भी, कथा श्रवण के प्रताप से राजा परीक्षित को परमधाम की प्राप्ति हुई। आचार्य ने मार्मिक शब्दों में समझाया कि भागवत कथा के श्रवण मात्र से ही मनुष्य के पापों का नाश होता है और उसे विष्णुलोक प्राप्त होता है।
कथा के दौरान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का प्रसंग बेहद भावपूर्ण रहा। जब सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर द्वारका पहुंचे और द्वारपालों से विनती की, तो ष्अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दोष् भजन पर पूरा हॉल भाव-विभोर हो गया और कई श्रद्धालुओं की आंखों से आंसू छलक पड़े। श्रीकृष्ण द्वारा सुदामा के नंगे पैर धोने और उनकी करुणामयी श्रद्धा के वर्णन ने श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। पूरा पंडाल श्श्रीकृष्ण जय होश् के नारों से गूंज उठा।
कथा वाचन में भजन गायिका कुमारी आंचल दुबे, आचार्य सचिन भारद्वाज, आचार्य अमित, आचार्य भीम, आचार्य अनुज पांडे, पंडित राकेश मोहन काला और कार्तिक ने मुख्य सहयोग दिया। कथा के भव्य आयोजन और व्यवस्थाओं को सफल बनाने में राजकली, अन्नू, अनीता, सीमा त्यागी, निर्मला, अरुण जिंदल, तजेंद्र कौशल, दीपक कपूर, अनुज पुंडीर, वंश शर्मा, पीयूष शर्मा, दीपक कुमार (पी एन बी), तन्नू चुग और सोनिया चौधरी की भूमिका महत्वपूर्ण रही। सात दिनों तक चली इस दिव्य कथा का समापन पूर्णाहुति और भंडारे के साथ हुआ।
श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता देख भावुक हुए श्रद्धालु, श्रीमद्भागवत कथा का भव्य समापन