बेहट की महिलाओं ने किया सांसद इमरान मसूद के आवास का घेराव

Women from Behat staged a gherao of MP Imran Masood's residence.

सहारनपुर। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर सहारनपुर की सियासत पूरी तरह गरमा गई है। शुक्रवार को बेहट विधानसभा क्षेत्र की सैकड़ों महिलाओं ने एकजुट होकर सहारनपुर लोकसभा सांसद इमरान मसूद के कैंप कार्यालय सह आवास पर जोरदार प्रदर्शन किया। आक्रोशित महिलाओं ने करीब डेढ़ घंटे तक आवास का घेराव कर नारेबाजी की और कांग्रेस पर महिला विरोधी होने का सीधा आरोप लगाया।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहीं भाजपा महिला मोर्चा की नेता रक्षा नामदेव ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में ही दोनों सदनों से पास होकर राष्ट्रपति की मंजूरी पा चुका है, लेकिन विपक्ष की मंशा इसे लेकर साफ नहीं है। उन्होंने मांग की कि यह कानून तुरंत लागू होना चाहिए ताकि 2027 के विधानसभा चुनाव में महिलाओं को 33ः आरक्षण का लाभ मिल सके। हाथों में तख्तियां लिए महिलाओं ने इमरान मसूद जवाब दो और महिला विरोधी कांग्रेस मुर्दाबाद के नारे लगाए।
प्रदर्शन में शामिल सारिका वालिया और रेनू कंबोज ने आरोप लगाया कि कांग्रेस दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद महिलाओं को हक देने में विफल रही। अब जब मोदी सरकार ने यह ऐतिहासिक कदम उठाया है, तो विपक्ष जनगणना और परिसीमन का बहाना बना रहा है। उन्होंने सांसद इमरान मसूद पर महिला मुद्दों पर संसद में मौन रहने का आरोप भी मढ़ा। घेराव में रक्षा नामदेव, सारिका वालिया, रेनू कंबोज, उषा उपाध्याय, सविता, रूमा चौधरी, कविता सैनी, मंजू त्यागी और रजनी शर्मा समेत बेहट व मुजफ्फराबाद क्षेत्र की लगभग 300 महिलाएं शामिल हुईं। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान सांसद आवास पर मौजूद नहीं थे और उनके प्रतिनिधि द्वारा ज्ञापन न लेने पर महिलाओं का आक्रोश और बढ़ गया।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33ः आरक्षण देता है। केंद्र सरकार के अनुसार इसे जनगणना और परिसीमन के बाद लागू किया जाना है, जिसे लेकर विपक्ष लगातार हमलावर है और इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने की मांग कर रहा है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सहारनपुर की मुस्लिम-दलित बाहुल्य बेहट सीट की महिलाओं का यह आक्रामक रुख कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। जहां कांग्रेस इसे भाजपा का चुनावी स्टंट बता रही है, वहीं महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि कानून जल्द लागू नहीं हुआ तो आंदोलन दिल्ली तक पहुंचेगा।

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