चैत्र नवरात्रि द्वितीय दिवसः वैष्णवी महाकाली मंदिर में मां भगवती का दिव्य श्रृंगार, उमड़ा भक्तों का सैलाब

सहारनपुर। राधा विहार स्थित महाशक्ति पीठ वैष्णवी महाकाली मंदिर में चैत्र नवरात्रि दूसरे नवरात्रि पर माता ब्रह्मचारिणी पूजा अवसर पर स्वामी कालेंद्रानंद महाराज ने कहा माता ब्रह्मचारिणी की शक्ति से ही सृष्टि का सृजन हुआ। श्री रामकृष्ण विवेकानंद संस्थान के तत्वाधान में आयोजित चौत्र नवरात्रि महोत्सव मैं दूसरे नवरात्रि पर मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि व्त की गई और मां भगवती की अष्टधातु प्रतिमा का पंचामृत से महा स्नान किया गया और दुर्गा सहस्त्रनाम स्तोत्र से मां आदिशक्ति ब्रह्मचारिणी माता का महा अभिषेक किया गया। इसके उपरांत मां भगवती का श्रंगार कर भोग अर्पण किया गया और माता की दिव्य एवं भव्य आरती उतारी गई । मां ब्रह्मचारिणी महिमा का वर्णन करते हुए स्वामी कालेंद्रानंद महाराज ने कहा मां आदिशक्ति ब्रह्मचारिणी का प्राकट्य ब्रह्म शक्ति के रूप में ब्रह्मा जी के कमंडल से हुआ मां ब्रह्मचारिणी की मूल शक्ति के द्वारा ही ब्रह्मा जी सृष्टि का सृजन कर पाए अर्थात मां ब्रह्मचारिणी सृष्टि के मूल की देवी हैं जो ज्ञान वैराग्य एवं भक्ति के साथ-साथ शक्ति की देवी मानी जाती है उन्होंने कहा मां ब्रह्मचारिणी का वेश साधक एवं तपस्वीय जैसा है। गले में रुद्राक्ष की माला हाथ में कमंडल जो भगवती के वैराग्य रूप है। कमंडल अन्नपूर्णा का रूप है, जिससे वह संसार का भरण पोषण करती है। माता ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से ज्ञान वैराग्य धन समृद्धि एवं सुख शांति की कृपा प्राप्त होती है और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है प्रत्येक जीव को अपने जीवन में तब ज्ञान एवं वैराग्य को धारण कर मां भगवती की शरणागत हो जाना चाहिए। इसी से जीव का कल्याण संभव है। इस अवसर पर पंडित ऋषभ शर्मा, रामेश्वरम शर्मा, राजेंद्र धीमान, राकेश राय, अश्विनी कंबोज, अमृत कश्यप, सागर गुप्ता, बबीता, राजबाला, कुसुम, रेखा, पूनम आदि रहे।

सहारनपुर। राधा विहार स्थित महाशक्ति पीठ वैष्णवी महाकाली मंदिर में चैत्र नवरात्रि दूसरे नवरात्रि पर माता ब्रह्मचारिणी पूजा अवसर पर स्वामी कालेंद्रानंद महाराज ने कहा माता ब्रह्मचारिणी की शक्ति से ही सृष्टि का सृजन हुआ।
श्री रामकृष्ण विवेकानंद संस्थान के तत्वाधान में आयोजित चौत्र नवरात्रि महोत्सव मैं दूसरे नवरात्रि पर मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि व्त की गई और मां भगवती की अष्टधातु प्रतिमा का पंचामृत से महा स्नान किया गया और दुर्गा सहस्त्रनाम स्तोत्र से मां आदिशक्ति ब्रह्मचारिणी माता का महा अभिषेक किया गया। इसके उपरांत मां भगवती का श्रंगार कर भोग अर्पण किया गया और माता की दिव्य एवं भव्य आरती उतारी गई ।
मां ब्रह्मचारिणी महिमा का वर्णन करते हुए स्वामी कालेंद्रानंद महाराज ने कहा मां आदिशक्ति ब्रह्मचारिणी का प्राकट्य ब्रह्म शक्ति के रूप में ब्रह्मा जी के कमंडल से हुआ मां ब्रह्मचारिणी की मूल शक्ति के द्वारा ही ब्रह्मा जी सृष्टि का सृजन कर पाए अर्थात मां ब्रह्मचारिणी सृष्टि के मूल की देवी हैं जो ज्ञान वैराग्य एवं भक्ति के साथ-साथ शक्ति की देवी मानी जाती है उन्होंने कहा मां ब्रह्मचारिणी का वेश साधक एवं तपस्वीय जैसा है। गले में रुद्राक्ष की माला हाथ में कमंडल जो भगवती के वैराग्य रूप है। कमंडल अन्नपूर्णा का रूप है, जिससे वह संसार का भरण पोषण करती है। माता ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से ज्ञान वैराग्य धन समृद्धि एवं सुख शांति की कृपा प्राप्त होती है और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है प्रत्येक जीव को अपने जीवन में तब ज्ञान एवं वैराग्य को धारण कर मां भगवती की शरणागत हो जाना चाहिए। इसी से जीव का कल्याण संभव है। इस अवसर पर पंडित ऋषभ शर्मा, रामेश्वरम शर्मा, राजेंद्र धीमान, राकेश राय, अश्विनी कंबोज, अमृत कश्यप, सागर गुप्ता, बबीता, राजबाला, कुसुम, रेखा, पूनम आदि रहे।

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